Jayatu Prayagam

हमारे बारे में (About Us)

हमारी ज्योतिष वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत है। यह प्लेटफॉर्म प्राचीन भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र के ज्ञान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से लोगों तक पहुँचाने के उद्देश्य से बनाया गया है। हमारा विश्वास है कि ग्रह-नक्षत्रों की चाल और कुंडली का अध्ययन मनुष्य के जीवन में आने वाली परिस्थितियों को समझने और सही दिशा चुनने में सहायता करता है। हमारी टीम अनुभवी और विद्वान ज्योतिषाचार्यों से जुड़ी हुई है, जो वर्षों के अध्ययन और साधना के बाद ज्योतिषीय गणनाओं और भविष्यवाणियों में दक्षता रखते हैं। हम कुंडली विश्लेषण, विवाह मिलान, करियर मार्गदर्शन, व्यापार, प्रेम संबंध, स्वास्थ्य और ग्रह दोष निवारण जैसे विषयों पर समाधान प्रदान करते हैं। हमारा उद्देश्य किसी को डराना नहीं बल्कि सही दिशा दिखाना है। ज्योतिष केवल भविष्य बताने का साधन नहीं बल्कि जीवन सुधार का माध्यम है।

📢 सूचना पटल (Notice Board)

दैनिक सामान्य पूजा विधि

दैनिक सामान्य पूजा विधि (पंचोपचार या संक्षिप्त पूजा) में पवित्रता और समर्पण के साथ भगवान का ध्यान, आसन, दीप प्रज्वलन, गंध-पुष्प अर्पण, और भोग लगाना शामिल है। यह विधि सुबह स्नान के बाद की जाती है, जिसमें मुख्य रूप से गणेश जी, शिवजी, दुर्गा जी, विष्णु जी और सूर्य देव (पंचदेव) की आराधना की जा सकती है। प्रेमपूर्वक मंत्रोच्चार और अंत में आरती व क्षमा याचना के साथ पूजा संपन्न होती है। 

सामान्य पूजा विधि (Step-by-Step)

  1. पवित्रता और तैयारी (Purification): स्नान के बाद स्वच्छ (साफ) वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान और सामग्री को गंगाजल से पवित्र करें।
  2. आसन शुद्धि (Seating): आसन ग्रहण कर पवित्रीकरण मंत्र या 'ॐ केशवाय नमः' बोलकर आचमन करें।
  3. दीपक प्रज्वलन (Lighting the Lamp): पूजा स्थल पर सबसे पहले दीपक जलाएं, उसे रोली/चंदन लगाएं।
  4. संकल्प (Vow): दाहिने हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर पूजा का संकल्प लें (दिन, समय और उद्देश्य का स्मरण करें)।
  5. पूजा (Worship - Panchopchar):
  • आवाहन/ध्यान: भगवान का ध्यान करें।
  • स्नान/जल: प्रतिमा पर जल या पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी) चढ़ाएं।
  • गंध/तिलक: चंदन, रोली, कुमकुम का तिलक लगाएं।
  • पुष्प/अक्षत: फूल और अक्षत (चावल) समर्पित करें।
  • धूप/दीप: धूप या अगरबत्ती दिखाएं।
  • नैवेद्य/भोग: फल, मिठाई या भोग अर्पित करें।
  1. आरती और क्षमा प्रार्थना (Aarti and Apology): कपूर या बाती से आरती करें और अंत में पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए भगवान से क्षमा मांगें।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत (बिना टूटे चावल)
  • दीपक, रुई की बाती, घी/तेल, धूप, अगरबत्ती
  • फूल (ताजे), माला, तुलसी दल (विष्णु जी के लिए)
  • कलश (जल के लिए), घंटी, शंख, पंचामृत
  • भोग (फल, मिठाई, मिश्री) 

विशेष नियम

  • दिशा: पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है।
  • गणेश जी को तुलसी न चढ़ाएं: गणेश जी की पूजा में तुलसी के पत्ते वर्जित हैं।
  • दीपक: दीपक से दीपक न जलाएं, इससे दरिद्रता आती है।
  • पीठ न करें: पूजा घर में भगवान की तरफ पीठ करके न बैठें।

Shree Vakratunda Mahakaya is a popular Ganesha Mantra to invoke the benevolent Lord's blessings. "Vakratunda Mahakaya" is one of the most popular Ganesh mantras recited by Hindus. It describes Lord Ganesha as one with a curved trunk and a mighty body, who has the magnificence of a million suns. Lord Ganesha is also the most widely worshipped deities amongst the Hindus and He is believed to be the remover of obstacles from our lives. Shree Vakratunda Mahakaya is one of the most loved prayers to Lord Ganesha- We salute the Supreme Lord Ganesha of the curved trunk ( Vakratunda ), whose radiance is like a million suns, may he bless all our endeavors and remove obstacles from our path.

श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा।।

Shree Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha

Nirvighnam Kuru Me Deva Sarva-Kaaryeshu Sarvada ||

Meaning :- "O lord with the twisted trunk, with the effulgence of a billion suns, always remove the obstacles when I am on an auspicious undertaking."

📝 प्रार्थना शुल्क सूचना (Submit Form)

Image 1

🎂 Age Calculator


Image 1